डकैती क्या है? | धारा 391 | धारा 392 | धारा 396 | धारा 397 | धारा 398 | धारा 398 | हिंदी

डकैती क्या है? | धारा 391 | धारा 392  | धारा 395 | धारा 396 | धारा 397 | धारा 398| हिंदी

 

 

आये दिन हर देश में असामाजिक तत्त्वों द्वारा असामाजिक घटनाओं(चोरी,डकैती,लूट,बलात्कार) को अंजाम दिया जाता रहा है। सरकारों के कड़े कानूनों के बनाये जाने पर भी इनमे कमी तो आयी किन्तु इन्हे पूर्णता: समाप्त नहीं किया जा सका है। जब ऐसी  समस्याएं बढ़ने लगीं और असहनीय हो गयीं तो विभिन्न देशों ने इससे निपटने के लिए प्रावधान बनाये। जो विभिन्न देशों में अलग अलग हैं।

                                                                                         भारत में ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए तथा दोषियों को सजा दिलाने के लिए भारतीय दंड संहिता में ऐसी घटनाओं हेतु प्रावधान किये गए जिनमे हम आज ‘डकैती’ के विषय में गहराई से जानेंगे। किन परिस्थितियों में डकैती के आरोप बनाते हैं? डकैती की क्या परिभाषा है ? इसकी सजा क्या है। इनके बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करेंगे।

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                    डकैती की परिभाषा (भारतीय दंड संहिता के अनुसार)

                                                  धारा 391 : डकैती   

जब पांच या उससे अधिक लोग मिलकर किसी लूट की वारदात को अंजाम देते हैं, या ऐसी किसी वारदात को अंजाम देने की कोशिश करते हैं, जहां वे लोग जो लूट करते है या करने की कोशिश करते हैं और वे लोग जो वह उपस्थित है और ऐसी लूट में उन लोगो की सहायता करते हैं या सहायता करने की कोशिश करते हैं।  यदि ऐसे लोगों की संख्या पांच या उससे अधिक हैं तब हर व्यक्ति जो ऐसी लूट की वारदात को अंजाम देता है या ऐसी  लूट के होने में सहयोग देता है, भारतीय दंड संहिता के अनुसार इसे ‘डकैती’ कहा जाता है।

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                                               धारा 392 : डकैती के लिए दण्ड    

 सजा : 10 वर्ष कारावास, ज़ुर्माना। 

जिस किसी की पर भी डकैती का आरोप सिद्ध होगा वह आजीवन कारावास या कठिन कारावास,जिसका अंतराल 10 वर्ष तक का हो सकेगा , के दण्ड का भागी होगा ,तथा जुर्माने से भी दण्डित किया जा जायेगा।  

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                                              धारा 396  : डकैती के दौरान हत्या करने पर सजा 

सजा : मृत्युदंड,आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक का कठिन कारावास। 

ऐसे पांच व्यक्ति या उससे अधिक जिनकी संलिप्तता उस डकैती में रही है, में से किसी यदि कोई एक व्यक्ति अगर इस प्रकार हत्या कर देगा तो ,तो उस समूह के हर व्यक्ति को मृत्युदंड या आजीवन कारावास से ,या कठिन कारावास जिसका अंतराल 10 वर्ष हो सकेगा ,से दण्डित किया जा सकेगा  और जुर्माने से भी दण्डित

 किया जा सकेगा।

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 धारा 397 : मृत्यु या घोर उपहति करित करने की कोशिश के साथ डकैती या लूट 

 सज़ा : 7 वर्ष तक का कारावास या उससे अधिक। 

अगर लूट या डकैती की घटना को अंजाम देते समय अपराधी किसी घातक आयुध या हथियार का प्रयोग करता है, या किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मृत्यु करित करने या घोर उपहति करित करने की कोशिश करेगा ,तो ऐसा अपराधी ,ऐसे कारावास से दंड का भागी होगा ,जो 7 वर्ष या उससे अधिक का हो सकेगा। 

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        धारा 398 : घातक आयुध से लैस होकर डकैती या लूट करने की कोशिश करना। 

सज़ा : 7 वर्ष तक का कारावास। 

यदि लूट या डकैती की कोशिश करते हुए ,अगर अपराधी किसी घातक आयुध से सज्जित हुआ पाया जायेगा,तो वह ऐसे कारावास से दंड का भागी होगा ,जिसका अंतराल 7 वर्ष तक का हो सकेगा तथा इससे कम का नहीं होगा। 

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                     धारा 399 : डकैती की योजना बनाना या डकैती की तैयारी करना 

सजा : 10 वर्ष तक का कारावास ,जुर्माना। 

जो कोई भी डकैती के लिए योजना बनाएगा या डकैती कीतैयारी करेगा वह कठिन कारावास ,जिसका अंतराल 10  तक का हो सकेगा के दंड का भागी होगा तथा जुर्माने से भी दण्डित किया जा सकेगा।


भारतीय दंड संहिता में उपयुक्त प्रावधानों के होते हुए भी ऐसा नहीं हुआ है कि ऐसी घटनाएं समूल नष्ट हो गयी है, हां ऐसा कहा जा सकता है कि इनमें कुछ सिमा तक गिरावट आयी है जो पर्याप्त नहीं है, मुख्यता लोग ऐसी घटनाओ को अंजाम रोज़गार के अभाव में देते हैं। ऐसी घटनाएं हर देश में ही है। लेकिन तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि अन्य देशों की तुलना में ये भारत में कहीं अधिक हैं। 

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