[हिंदी ]| Section 498| | धारा 498 -A क्या है ? 498-A Latest Update | Section 498-A Punishment | What Is Section 498-A

[हिंदी ] [हिंदी ]| दहेज निरोधक कानून | धारा 498 -A क्या है |?498-A Latest Update | Section 498-A Punishment | What Is Section 498-A

विवाहित महिलाओं को दहेज उत्पीड़न से बचाने के लिए 1986 में भारतीय दंड संहिता में 498-A को जोड़ा गया। जिसे दहेज निरोधक कानून की संज्ञा मिली।  तथा बाद में इसके लिए घरेलु हिंसा से महिला संरक्षण जैसे अधिनियम  2005 में लाये।

उस समय परिस्थितयाँ ऐसी थी कि लोग दहेज़ के लिए अपनी पत्नियों को उत्पीड़ित किया करते थे। और ये सब आज की तुलना में बहुत अधिक हुआ करता था। जिसके कारण 2005 में महिलाओं को उनके अत्याचारी पतियों के खिलाफ एक रामवाण दिया गया जो दहेज निरोधक कानून कहलाया। महिलाओं को राहत मिली अब काफी हद तक ऐसी घटनाये काम हो गयी। लेकिन धीरे धीरे इसका दुरूपयोग होने लगा। और ये पुरुषों को डराने वाला हथियार बन गया।  अब पति पत्नी में छोटा मोटा झगड़ा भी होता तो पत्नी उसे 498-A  की धमकी देती।  कुछ केस तो ऐसे भी सामने आये जहाँ सिर्फ मैडम का ईगो हर्ट हो गया और उन्होंने 498 -A दे मारा। 


धारा 498-क: किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना। – जो नहीं, किसी महिला का पति या पति का रिश्ता होता है, ऐसी महिला के प्रति क्रूरता, करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि 3 वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।

 

 जहां क्रूरता से अभिप्राय:

(A)जानबूझकर किया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रकृति का है जिससे उस स्त्री को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने की या उस स्त्री के जीवन अंग , या स्वास्थ्य को जो चाहे (मानसिक या शारीरिक) गंभीर क्षति का खतरा कार्य करने की संभावना है।

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(B)किसी स्त्री को इस दृष्टि से तंग करना कि उसको या उसके किसी रिश्तेदार को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की कोई मांग पूरी करने के लिए प्रेरित किया जाए या किसी स्त्री को इस कारण तंग करना कि उसका कोई रिश्तेदार ऐसी मांग पूरी करने में असफल रहा है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 498 के अनुसार विवाह के पश्चात ससुराल पक्ष द्वारा महिला के प्रति दहेज के लिए की गई किसी प्रकार की क्रूरता या मानसिक शारीरिक हिंसा की सूरत में धारा 498-A के तहत केस चलाया जा सकेगा।  और आरोपी के आरोप साबित होने पर इंडियन पेनल कोड की धारा 498-A के तहत दंड का भागी होगा।  यह एक गंभीर अपराध है। तथा गैर जमानती भी।  यह मात्र उसके  पति पर लागू ना होकर तमाम परिवारी जनों पर भी हो सकता है।

सजा : (A)अभियुक्त को अधिकतम 3 वर्ष की सजा हो सकती है।

(B)महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाना और यदि मौत 7 वर्ष के भीतर होती है अभियुक्त भारतीय दंड संहिता की धारा 304-B के अनुसार दंड का भागी हुआ जिसमें कि वह आजीवन कारावास की अवधि की सजा जिसे 10 साल तक बदला जा सकेगा का भागी होगा तथा अर्थदंड का अन्यथा भागी होगा।

(C) 498-A  के तहत पहले महिला के F.I.R. दर्ज कराने के बाद जांच कमेंटी आरोपों की जांच करती थी और फिर आरोपी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाता था।  सितम्बर 2018 के संशोधन के बाद अब आरोपी को बिना जांच के ही पुलिस हिरासत में लेने का प्रावधान है।

दहेज लेना और देना दोनों ही दहेज निरोधक कानून-8 के अनुसार गैरकानूनी है।

एक सर्वे  के अनुसार 498-A  तहत जितने भी केस दर्ज कराये गए उनमे से 80 % फर्जी पाए गए। धारा  498 -A  क्या है। 498 -A को कानूनी आतंक की संज्ञा भी प्राप्त है।

वास्तव में तो यह वर पक्ष को डरने का एक मजबूत हथियार सा बन गया है। लुधियाना के एक परिवार पर तो 498 -A  का इस प्रकार दुरूपयोग किया गया की उनके पूरे परिवार को  जेल जाना पड़  गया ।

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