Defamation Meaning | Defamation Meaning In Hindi | Defamation Law | धारा 499 क्या है? | मानहानि | हिंदी

Defamation Meaning | Defamation Meaning In Hindi | Defamation Law | धारा 499 क्या है? | हिंदी

 

यह कानून ब्रिटिश काल की देन है।  इसे एक आपरधिक कृत्य कहा जाता है।’मानहानि’ अपने आप में एक बड़ा व्यापक शब्द है। आए दिन आपने यह शब्द या इससे जुडी घटनाये आपने अपने टीवी,अखबार या या जो आज कल दुनियाभर के जनसम्पर्क माध्यम हो गए है। उनके माध्यम से सुना होगा। अभी कुछ दिनों पहले ही अरविन्द केजरीवाल और अरुण जेटली का मुद्दा मानहानि वाद गरमाया रहा। राम जेठमलानी जैसे नामी वकील इस केस से जुड़े रहे। 

                                                                मानहानि का शाब्दिक अर्थ “सम्मान की हानि” से होता है। इसमें किसी व्यक्ति की छवि को ख़राब करने हेतु उसके खिलाफ दुष्प्रचार करना,लिखित या सांकेतिक तरीके से उसकी छवि को धूमिल करने की कोशिस  की जाती है।  और ऐसे में मानहानि का केस बनता है। 

                                         धारा  499-मानहानि [भारतीय दंड संहिता]

 जो कोई बोले गए अथवा पढ़े जाने के लिए आशयित  शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या अन्य दृश्यरूपणों  द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में लांछन इस आशय से लगाता या  प्रकाशित करता है।  कि ऐसे लांछन से किसी व्यक्ति की ख्याति की अप-हानि  की जाए या यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए लगाता या  प्रकाशित करता है।  कि ऐसे लांछन से ऐसे व्यक्ति की ख्याति की हानि होगी, एतस्मिन पश्चात अपवादित दशाओं के सिवाय उसके बारे में कहा जाता है कि वह उस व्यक्ति की मानहानि करता है।                                                                                        

                                                                                                              (मूल धारा से)

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 स्पष्टीकरण (1).  किसी मृत व्यक्ति को जो लांछन लगाना मानहानि की कोटि  में आ सकेगा यदि वह लांछन उस व्यक्ति की ख्याति की, यदि वह जीवित होता है, अप हानि करता , और उसके परिवार या अन्य निकट संबंधियों की भावनाओं को आहत करने के लिए आज आशयित हो। 

स्पष्टीकरण (2). किसी कंपनी का संगम या व्यक्तियों के समूह के संबंध में उसकी वैसी हैसियत में कोई लांछन लगाना मानहानि की कोटि में आ सकेगा।

स्पष्टीकरण (3).  अनुकल्प के रूप में या व्यंग युक्ति के रूप में अभिव्यक्त लांछन मानहानि की कोटि में आ सकेगा।

स्पष्टीकरण (4). कोई लांछन किसी व्यक्ति की ख्याति की अपहानि करने वाला नहीं कहा जाता जब तक कि वह लांछन दूसरों की दृष्टि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उस व्यक्ति के सदाचार हित या बौद्धिक स्वरूप को हेय ना करें या उस व्यक्ति की जाति के या उसकी आजीविका के संबंध में उसके शील को हेय ना करें या उस व्यक्ति की साख को नीचे ना गिराए या यह विश्वास ना कराए कि उस व्यक्ति का शरीर ऐसी दशा में है जो साधारण रूप से निकृष्ट समझी जाती है

इसके अपवाद कुछ इस प्रकार है।

अपवाद (1). सत्य बात का लांछन जिसका लगाया  जाना या प्रकाशित किया जाना लोक कल्याण के लिए अपेक्षित है किसी ऐसी बात का लांछन लगाना ,जो किसी व्यक्ति के संबंध में सत्य हो मानहानि नहीं है,यदि यह लोग कल्याण के लिए हो कि वह लांछन लगाया जाए या प्रकाशित किया जाए ।वह लोक कल्याण के लिए है या नहीं यह तथ्य का प्रश्न है।

अपवाद (2). लोक सेवकों का लोक आचरण : उसके लोग कृतियों के निर्वहन में लोकसेवा के आचरण के विषय लोक या में या उसके शील के विषय में जहां तक उसका शील उसउस आचरण से प्रकट होता हो ना कि उससे आगे कोई राय चाहे वह कुछ भी हो, सदभावना पूर्वक अभिव्यक्त करना मानहानि नहीं हैं।

अपवाद (3). किसी लोकप्रश्न के संबंध में किसी व्यक्ति का आचरण : लोकप्रश्न के संबंध में किसी व्यक्ति के आचरण के विषय में और उसके शील के विषय में जहां तक कि उसका शील  उसके आचरण से प्रकट होता हो ना कि उसके आगे कोई राय, चाहे वह कुछ भी हो ,सद्भाव पूर्वक व्यक्त करना मानहानि नहीं है।

अपवाद (4). न्यायालयों की कार्यवाहीयों की रिपोर्ट का प्रकाशन : किसी न्यायालय की कार्यवाही  या किसी ऐसी कार्रवाइयों के परिणाम की सारता सही रिपोर्ट को प्रकाशित करना मानहानि नहीं है।

स्पष्टीकरण-  कोई न्यायाधीश या अन्य ऑफिसर है जो किसी न्यायालय में विचारण से पूर्व की प्रारंभिक जांच खुले न्यायालय में कर रहा हूं उपर्युक्त धारा के अर्थ के अंतर्गत न्यायालय हैं।

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अपवाद (5). किसी ऐसे मामले में या विषय में चाहे वह सिविल हो या दंडिक जो किसी न्यायालय द्वारा भी निश्चित हो चुका हो या किसी ऐसे मामले के पक्षकार साक्षी या अभिकर्ता के रूप में किसी व्यक्ति के आचरण के विषय में या व्यक्ति के शील के विषय में जहां तक कि उसका शील उसका आचरण से प्रकट होता है ना कि उससे आगे कोई राय, चाहे कुछ भी हो, सद्भाव पूर्वक व्यक्त करना मानहानि नहीं है।

अपवाद (6). किसी ऐसी कृति के विषय में जिसको उसके कर्ता ने लोक निर्णय के लिए रखा हो या उसके करता की सील के विषय में जहां तक कि उसका शील ऐसी कृति में प्रकट होता हो ना कि उस आगे कोई राय, सद्भाव पूर्वक अभिव्यक्त करना मानहानि नहीं है।

स्पष्टीकरण-कोई कृति लोक निर्णय के लिए अभिव्यक्त रूप से या कर्ता की ओर से किए गए कार्यों द्वारा, जिनसे लोक के निर्णय के लिए ऐसा रखा जाना विवक्षित हो रखी जा सकती है।

अपवाद (7). किसी अन्य व्यक्ति के ऊपर विधि पूर्ण प्राधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा सद्भाव पूर्वक की गई परिनिंदा : किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जो किसी अन्य व्यक्ति के ऊपर कोई ऐसा प्राधिकार रखता हो जो या तो विधि द्वारा प्रदत्त हो या और अन्य व्यक्ति के साथ की गई किसी विधि पूर्ण संविदा से युक्त हो ऐसे विषयों में जिनसे की ऐसा विधि पूर्ण प्राधिकार संबंधित हो उस अन्य व्यक्ति के आचरण की सद्भाव पूर्वक की गई कोई परिंदा मानहानि नहीं है।

अपवाद (8). प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सद्भावपूर्वक अभियोग लगाना- प्राधिकृत व्यक्ति के समक्ष सद्भाव पूर्वक अभियोग लगाना ऐसे व्यक्तियों में से किसी व्यक्ति के समक्ष लगाना जो उस व्यक्ति के ऊपर अभियोग की विषय वस्तु के संबंध में विधि पूर्ण प्राधिकार रखते हो, मानहानि नहीं है।

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अपवाद (9). अपने या अन्य के हितों की सुरक्षा के लिए किसी व्यक्ति द्वारा सद्भाव पूर्वक लगाया गया लांछन-किसी अन्य के शील पर लांछन लगाना मानहानि नहीं है परंतु तब जबकि उसे लगाने वाले व्यक्ति के या किसी अन्य व्यक्ति के हित की सुरक्षा के लिए या लोक कल्याण के लिए, वह लांछन सद्भाव पूर्वक लगाया गया हो ।

अपवाद(10). सावधानी, जो व्यक्ति की भलाई के लिए, जिससे कि वह दी गई है या लोक कल्याण के लिए आशातीत है- एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध सद्भाव पूर्वक सावधान करना मानहानि नहीं है परंतु यह जबकि ऐसी सावधानी उस व्यक्ति की भलाई के लिए, जिसे वह दी गई हो या किसी ऐसे व्यक्ति की भलाई के लिए जिससे वह व्यक्ति हित बंद हो या लोक कल्याण के लिए आशातीत हो।

                                    मानहानि के विभिन्न प्रकार

(1). शारीरिक अक्षमता के आधार पर।

      शारीरिक अक्षमताओं के आधार पर सामान्यता किसी से भी उसकी अक्षमता के अनुसार बुरा भला कह दिया जाता है. जिसे न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।

 और साबित होने पर उसे दंड भी दिलाया जा सकता है।  

(2).   जाति, वंश, धर्म के आधार पर। 

 हमारे समाज में आज भी जब संविधान के अनुच्छेद  17 के तहत अस्पृश्यता का अंत कर दिया गया। तब भी आये दिन लोगो को उनकी जाति,धर्म, वंश के आधार पर उनपर अभद्र टिप्पणियां की जाती है। कुछ हद तक ये मानहानि की श्रेणी में भी आती है। इसमें मुख्यता उनकी जाति से सम्बंधित कटाक्ष किये जाते हैं। जो कई बार रौद्र रूप ले कर सामुदायिक हिंसा में परिवर्तित हो जाते है।  ऐसे में भी मानहानि के अंतर्गत जाकर  न्यायालय की शरण ली जा सकती है। 

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(3). छवि ख़राब करने की मंशा पर। 

किसी ऐसे व्यक्ति जिसकी समाज में अच्छी प्रतिष्ठा है। उसकी छवि ख़राब करने की मंशा से काफी बार लोग उनके बारे में कुछ अभद्र टिप्पणियां कर बैठते और बाद में मानहानि के मुकदमें झेलते है। इनमें मुख्यता  राजनीतिज्ञ आते है। जोआये दिन ऐसे मुकदमें करते हैं।  

इस तरह के अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता में दंड निर्धारित किये गए है। जो कि IPC  की धारा 500,501 तथा 502 में दिए गए हैं।

                                     धारा 500 [मानहानि के लिए दंड]

 जो कोई किसी अन्य व्यक्ति की मानहानि करेगा,वह सादा कारावास से जिसकी अवधि 2 वर्ष तक की हो सकेगी या  जुर्माने से ,या दोनों से दण्डित किया जायेगा।  

              धारा 501[मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीण करना] 

जो कोई किसी मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ को जिसमें मान हानिकारक विषय अंतर्गत है यह जानते हुए कि उसमें ऐसा विषय अंतरविष्ट है बेचेगा, या बेचने की प्रस्तावना करेगा मैं सादा कारावास से,जिसकी अवधि 2 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा।


धारा 502[मानहानि विषय रखने वाली मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का बेचना

जो कोई किसी मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ को जिसमें मान हानि कारक विषय अंतर्गत है यह जानते हुए कि उसमें ऐसा विषय अंतर निहित है बेचेगा या बेचने की स्थापना करेगा वह साधारण कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाए

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