#Metoo | metoo meaning | metoo movement

#Metoo | metoo meaning | metoo movement  पहले तो मैं कहूंगा की मैं भगवान् नहीं हूँ। फिर जो कुछ भी आज कल ये #MeToo movement चल रहा है मै इसे अपने तरीके से पूरी तरह से सही नहीं मानता फिर वो चाहे पुरूषों की तरफ़ से हो या महिलाओं की। अब अगर मैं महिलाओं  की तरफ खुलकर समर्थन में आ जाऊँ तो ये पुरुषो के  साथ बेईमानी होगी। गुनहगारों को सजा मिलनी ही चाहिए और  वो कहीं न  कहीं मिलकर ही रहती है। लेकिन उनकी यह बात ” कि आप अभी तक क्यों नहीं बोली ?” इसका भी एक सटीक जवाब  आपको सोच कर रखना होगा। अगर तब (3 -4 साल पहले ) आप  डर या शर्म की वजह से आप चुप थी तो आज 3-4 साल बाद एक दम से ऐसा क्या हुआ कि आपकी शर्म और डर एक साथ चले गए। अब शायद यहाँ आपकी यह दलील चल जाये कि तब आप अकेली थी और अब आपके साथ जनसमर्थन जुड़ गया। तो आपका डर  ख़तम हो गया। फिर तो आपमें और में मोब लिंचिंग वाले लोगो में एक धागे जितना ही फ़र्क़ रह जाता है।

कहने का आशय सिर्फ इतना सा है। की अगर आप लोगो पर इल्जाम लगाते हैं। तो जरा सोच कर  लगाइये और सबूतों के साथ लगाइये क्योकि अगर आप यह लड़ाई नहीं जीतती हैं।  तो आपकी ये हार लाखो – करोड़ों महिलाओं को हतोत्साहित कर देगी और आप की यह सहने की आदत आपको हमेशा ऐसे ही दिन बार-बार दिखाती  रहेगी।  एक और बात ये कि ये हमारा ही कर्त्तव्य है और शायद ये हम ही कर सकते हैं। कि  इस मंच को  प्रचार पाने का जरिया न बनने दें। और #MeToo  उत्पीड़ित महिलाओ  की आवाज बुलंद करने का मंच बना रहे। 

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