National Emergency | राष्ट्रीय आपातकाल 356 | आपात काल क्या है ? | हिंदी

 National Emergency | राष्ट्रीय आपातकाल 356 | आपात काल क्या है ? | हिंदी 

                            आपात काल क्या है ?

 राष्ट्रीय आपातकाल से अर्थ  देश में उस स्थिति से है,जब देश में कोई बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह मुद्रा का विफल हो जाना,सुरक्षा संकट या देश में संवैधानिक ढांचे का विफल हो गया हो।

                                                                                                                                               देश में अब तक तीन बार आपातकाल लगाया जा चुका है।


                                                  1. भारत चीन युद्ध (1962) के दौरान

                                                  2. भारत पाकिस्तान युद्ध (1971) के दौरान

                                                  3. इंदिरा गांधी सरकार द्वारा(1975)के दौरान


भारतीय संविधान के 17 में आपात उपबंध शीर्षक में विभिन्न अनुच्छेदों के अनुसार किस प्रकार लगाया जाता है, का विवेचन है, जो इस प्रकार हैं।

           

 

अनुच्छेद 352-आपात की उद्घोषणा [Proclamation Of Emergency]

[1].यदि राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है, कि गंभीर आपात देश के किसी क्षेत्र में विद्यमान है, जिसे युद्ध या बाह्यआक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत या उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा संकट में है,तो वह उद्घोषणा (घोषणा) द्वारा संपूर्ण भारत या उसके राज्य क्षेत्र के ऐसे भाग के संबंध में जो (उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट किया जाए) इस तरह की घोषणा कर सकेगा।

स्पष्टीकरण 

             यदि राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का संकट निकट (पास) है तो यह घोषित करने वाली आपात की उद्घोषणा की युद्ध या बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से भारत और उसके राज्य क्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा संकट(विपदा) में है, युद्ध या ऐसे किसी आक्रमण या विद्रोह के वास्तव में होने से पहले भी की जा सकेगी।

[2]. खंड (1)के अन्तर्गत की गई घोषणा किसी भी पहले की गई घोषणा द्वारा बदली जा सकेगी या उसको वापस लिया जा सकेगा।

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[3]. राष्ट्रपति खंड 1 के अधीन घोषणा या ऐसी घोषणा में परिवर्तन करने वाली घोषणा तब तक नहीं कर पाएगा,जब तक की केंद्र के मंत्रिमंडल का अर्थात उस परिषद का जो अनुच्छेद 75 के अधीन प्रधान मंत्री और मंत्री मंडल स्तर के अन्य मंत्रियों से मिलकर बनती है, यह निश्चय करें कि ऐसी घोषणा की जाए उसे लिखित रूप में संसूचित नहीं किया जा सकता।


[4]. इस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई प्रत्येक घोषणा संसद के दोनों सदनों जिनमें में राज्यसभा लोकसभा आते हैं के समक्ष परखा जाना अनिवार्य है,और जहां पहले की गई घोषणा को वापस लेने वाली घोषणा नहीं है वहां वह 1 महीने की समाप्ति पर यदि उस कार्यक्रम की समाप्ति से पहले संसद के दोनों सदनों लोकसभा राज्यसभा के संकल्पों द्वारा उसका अनुमोदन नहीं कर दिया जाता है तो प्रवर्तन में नहीं रहेगी।

लेकिन अगर कोई घोषणा जो पहली घोषणा को वापस लेने वाली घोषणा नहीं है, उस समय की जाती है जब लोकसभा भंग की जा चुकी है या लोकसभा का विघटन खंड में निर्दिष्ट 1 महीने के काल के दौरान हो जाता है और यदि घोषणा का अनुमोदन करने वाला संकल्प राज्य सभा द्वारा पारित कर दिया गया है लेकिन ऐसी घोषणा के संबंध में कोई संकल्प लोकसभा द्वारा उस कार्यक्रम की समाप्ति से पूर्व पारित नहीं किया गया है तो घोषणा उस तारीख से जिसको लोकसभा अपने पुनर्गठन के बाद पहली बार बैठती है 30 दिन के अंदर प्रवर्तन में नहीं रहेगी ,यदि 30 दिन की अवधि की समाप्ति से पहले घोषणा का अनुमोदन करने वाला संकल्प लोकसभा द्वारा पारित नहीं कर दिया जाता है।

(5). एक बार की गई घोषणा 6 माह से अधिक प्रवृत्त नहीं रहेगी।

(6). घोषणा के लिए संकल्प संसद के किसी भी सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा तथा उच्च सदन के उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों में से कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा ही पारित किया जाएगा।

आपात की घोषणा का प्रभाव (Effects Of Emergency)

अनुच्छेद 353. 

 जब आपात की घोषणा प्रवर्तन में है तब,

(1). संविधान में किसी बात के होते हुए भी, केंंद्र की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार किसी प्रांंत को इस बारे में निर्देश देने तक होगा कि वह प्रांत अपनी कार्यपालिका शक्ति का किस तरह प्रयोग करे।

अनुच्छेद 354.

जब आपातकाल की घोषणा प्रवर्तन में है,तब राजस्व के वितरण संबंधी उपबंधो का लागू होना।

(1). जब आप आज की घोषणा प्रवर्तन में है तब राष्ट्रपति आदेश द्वारा, यह निर्देश दे सकेगा कि संविधान के अनुच्छेद 268 से अनुच्छेद 279 के सभी या कोई उपबंध ऐसी किसी अवधि के लिए ,जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए और जो किसी भी दशा में उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से आगे नहीं बढ़ेगा जिसमें ऐसी घोषणा प्रवर्तन में नहीं रहती है ऐसी अफवा दो या उपंतरणो के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे जो बैठक समझे।

अनुच्छेद 355. 

बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्य की संरक्षा करने का केंद्र का कर्तव्य-

केंद्र का यह कर्तव्य होगा कि वह बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करें और प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबंध के अनुसार चलाए जाना निश्चित करें।


अनुच्छेद 356.

प्रांतों में संवैधानिक तंत्र की विफल हो जाने पर प्रयुक्त नियम

यदि राष्ट्रपति का किसी राज्यपाल से प्रतिवेदन मिलने पर यह समाधान हो जाए ऐसी परिस्थितियां हो गई है जिसमें उस प्रांत का शासन इस संविधान के नियमों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता ,तो राष्ट्रपति उद्घोषणा द्वारा-

(A). उस राज्य सरकार के सभी या कोई या विधान मंडल से विलग कोई भी शक्ति या कार्य अपने हाथ में ले सकेगा।

(B).घोषणा कर सकेगा कि राज्य के विधान मंडल की शक्तियां संसद द्वारा या उसके प्राधिकार के अधीन प्रोक्तव्य होंगी।

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अनुच्छेद 359 

 आपातकाल के दौरान संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन का निलंबन-

जहां आप आज की उद्घोषणा प्रवर्तन में है वहां राष्ट्रपति आदेश द्वारा यह घोषणा कर सकेगा कि अनुच्छेद 20 ,21 को छोड़कर भाग-3 द्वारा प्रदत्त ऐसे अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए जो उस आदेश में उल्लेखित किए जाएं किसी न्यायालय को सम आवेदन करने का अधिकार और इस प्रकार उल्लेखित अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए किसी न्यायालय में लंबित सभी कार्यवाही या उस अवधि के लिए जिसके दौरान उद्घोषणा प्रवृत्त रहती है या उससे लघु अवधि के लिए जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित रहेंगी।

भारत में प्रथम बार आपातकाल (इंडिया चाइना युद्ध)

भारत में पहली बार 26 अक्टूबर 1962 को सबसे पहली बार भारत में एक युद्ध के कारण आपातकाल की घोषणा की गई यह युद्ध भारत और चीन के मध्य था। जिसमें चीन ने भारत पर अचानक से आक्रमण कर दिया और जिसमें चीन की जीत मानी गई।

भारत में दूसरी बार आपातकाल (भारत पाकिस्तान युद्ध)

भारत में दूसरी बार 3 दिसंबर 1971 को आपातकाल की घोषणा की गई। यह आपातकाल भारत पाकिस्तान के युद्ध के कारण अस्तित्व में आया , जिसमें भारत की जीत मानी जाती है।

भारत में तीसरी बार आपातकाल

25 जून 1975 को भारत में तीसरी बार आपातकाल की घोषणा की गई, राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इसकी घोषणा की। इस आपातकाल की अवधि 21 महीने की रही।

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