Statue Of Unity | Statue Of Unity Contractor | Worlds Tallest Statue | Hindi

Statue Of Unity | Statue Of Unity Contractor | Worlds Tallest Statue | Hindi

Statue Of Unity | Statue Of Unity Contractor | Worlds Tallest Statue

Statue Of Unity | Statue Of Unity Contractor | Worlds Tallest Statue                           जैसे-जैसे 2019 के चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं,हम अभी से देख पा रहे हैं कि हर तरफ देश भक्ति की हवाएं चलने लगे वर्तमान में ‘गांधी के सिपाही’ सरदार वल्लभ भाई पटेल की गुजरात के केवड़िया में  182 मीटर विशालकाय मूर्ति चर्चा में जिसे वर्तमान सरकार ने ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ की संज्ञा प्रदान की है कुछ हो ना हो भाई साहब नाम में देशभक्ति झलकती है।  हमारे यहां जब किसी की नकल की जाती है तो हम उसे नकल ना कहकर इंस्पायर बताते हैं तो मैं इसके नाम को नकल ना कहकर स्टैचू ऑफ लिबर्टी से इंस्पायर्ड कहूंगा और आपकी जानकारी में बढ़ोतरी करने के लिए मैं बता दूं कि यह देश भक्ति हमें 3000 करोड़ की पड़ी है। और देश के बड़े लोग ₹350 खर्च करके इसे देखने जाया करेंगे मेरे जैसे गरीब लोगों का सरदार पटेल जी पर कोई अधिकार नहीं है क्योंकि मेरे जैसे गरीब लोग स्मार्ट फोन में रिचार्ज करा कर ही सरदार जी को देख सकते हैं।

जबुझे पता चला कि यह प्रतिमा हमारे ही टैक्स के पैसे से बनी है तब से मैं भी अपने पिताजी को बदले की भावना से देखने लगा हूं वैसे मेरे मन में एक बेहतर विचार यह भी आ रहा है।  कि उनकी इतनी विशाल प्रतिमा बनाने से अच्छा कई हॉस्पिटल ,कॉलेजेस खोल कर वहां सरदार जी की मूर्ति स्थापित कराई जा सकती थी जिससे  मेरे जैसे गरीब भी उनके रोज दर्शन कर सकते थे और सरदार पटेल को हमारे देश का बच्चा-बच्चा जानने लगता।

                           दिवाली आते आते हमारे देश की यह परंपरा है कि हर बार चीन को गालियां देनी ही  देनी है।  मेरे व्हाट्सएप पर भी मैंने ऐसा करना अपना परम कर्तव्य समझा है। और अब तक मैं यह जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाता आया हूं।  लेकिन अब तो बड़ी दुविधा है ,इस प्रतिमा को बनवाने में चीन से मदद ली गई है अब समझ में यह नहीं आ रहा कि चीन को गालियां दूं यह हिंदी-चीनी भाई-भाई वाला नारा एक बार फिर से लगाऊँ, दोनों ही स्थितियों में मेरी देशभक्ति पर सवाल उठने तय हैं। 

एक और बात यह इस प्रतिमा के साथ ही साथ नेहरू बनाम सरदार का खेल शुरू हो गया है जो कि जितना इतिहास मैंने पढ़ा है उसे कहीं से भी सही नहीं पाया।

फिर जब उन 22 गांवो के प्रधान का प्रधान मंत्री के लिए खत पढ़ता हूं।  तो आत्मा से सिहर उठती है।

 जो इस प्रकारहै। –

“यहां के जंगलों नदियों जलप्रपात ओं खेतों ने सदियों से हमारा ख्याल रखा है हम इन्हीं के आश्रय जीते रहे हैं लेकिन अब सब नष्ट किया जा रहा है क्या आपको नहीं लगता कि यह किसी की मौत पर जश्न की तरह होगा हमें तो ऐसा ही लगता है हम गांव वाले बहुत दुख के साथ कहना चाहते हैं कि हम 31 अक्टूबर को आपका स्वागत नहीं करेंगे आप बिन बुलाए मेहमान की तरह आएंगे तो हम आपका स्वागत नहीं करेंगे अगर सरदार पटेल ने देखा होता कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट किया जा रहा है हमारे साथ अन्याय हो रहा है तो वो भी रो देते जब हम अपनी आवाज उठा रहे हैं आप की पुलिस कार्यवाही कर रही है आप हमारी तकलीफों को सुनने के लिए तैयार क्यों नहीं है।”

                                                       सरदार जी ने देश का एकीकरण किया आज जब उन्हें यह पता चलता कि उनके नाम पर ऐसी राजनीति की जा रही है तो शायद ही वे ऐसा होने देते अंत में एक फायदा मुझे यही दिखा कि देश विदेश से लोग सरदार जी को देखने आएंगे और गुजरात जो पहले ही विकसित है। और विकसित होगा। 

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#BharatMataKiJai

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